फैशन डिज़ाइन: एक सम्पूर्ण मार्गदर्शिका
Fashiongrandtechnology,Fashion sewing knowladge,fashion technology, dress making,textile,fabric painting knowadge, sewing tools,theory, tailoring knowadge, colours, fashion knowadge,sewing machine parts knowadge Internal & Extarnal,fashion show,fashion knowladge,
फैशन डिज़ाइन का इतिहास और विकास
उनके नाम के साथ फैशन डिजाइनर सामग्री। Fashion designer materials with their name.
परिधान निर्माण से संबंधित शब्दकोश कौन-कौन से हैं? What are the dictionaries related to garment manufacturing?
dictionaries related to garment
परिधान निर्माण से संबंधित शब्दकोश कौन-कौन से हैं? What are the dictionaries related to garment manufacturing?
:--- कुछ खास व आम दोनों प्रकार के वस्त्र हैं जिनका प्रयोग किया जाता है।
1. अल्पाका (Alpaca) :- ऊन के सामान दिखाई देने वाला दो प्लाई यारन से बना मंद रूप वाला कपड़ा होता है।
2. बल बिरगान ( Balbriggan):- साधारण ढंग से बुना गया एक कॉटन कपड़ा है।
3. बैलून कॉटन ( Balloon cotton) :-
सादी बुनाई से बना सूक्ष्म यारन का सूती वस्त्र होता है।
4. बाराथिया (Barathea):- एक विभंग रूप बुनाई का बना कपड़ा होता है।
5. बेटिस्ट (Batiste) :- हल्के रंग का चिकना ऊनी कपड़ा होता है।
6. ब्रॉड क्लॉथ (Broad Cloth):- रोए वाला चमकदार ऊनी कपड़ा होता है जिसके रोए प्रेस करके दवा दिए जाते हैं।
7. बकरम (Buckram) :- सूती कपड़ा कड़ी मांडी वाला होता है जो मूल कपड़े को सख्त करने के लिए उल्टी और लगा देते हैं।
8. बर्लैप (Burlap) :- जूठ से बना कड़ा और भारी कपड़ा जो दरी के अस्तर के लिए तथा फर्नीचर में भरने के काम आता है।
9. ब्यूचर रेयन (Butcher Rayon) :- एक कीरीज रेजिस्टेंट रेयन का कड़क कपड़ा है जो अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग वजन में बनाया जाता है।
10. कैंब्रिक (Cambric) :- एक अति सूक्ष्म महीन संघन सादी रचना से बना हल्का कलफ लगा कपड़ा जिसकी एक साइड चिकनी वह हल्की चमक वाली होती है। खासतौर से ब्लाउज वह मर्दानी कुर्ते बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
11. कैनवास (Canvas) :- एक भारी दृढ़ रचना का कपड़ा जो कपास या लिनन से बनता है एक तरफ ऐसी कोटिंग करते हैं कि पानी दूसरी तरफ ना जा सके।
12. केसमेंट ( Casement) :- हल्का शादी बुनाई का थोड़ा सा टॉप कपड़ा होता है जिसे चादरे पर्दे मेजपोश बनाने के काम में लिया जाता है।
13. शाली (Challis) :- एक हल्का शादी बुनाई संतुलित रचना तथा कोमल परी सज्जा का कपड़ा होता है।
14. केवलरी - ट्वीड ( Cavalry Twill) :- चितना, दोहरी रखाओं वाली ट्कावील का बना कपड़ा होता है।
15. चाइना सिल्क (China silk) :- एक मुलायम,सादी सतह का,सादी बुनाई वाला सिल्क के समान कपड़ा होता है।
16. चिनचिला (Chinchilla) :- एक भारी ट्विल बुनाई से बना ऊनी कपड़ा होता है जो रोएंदार होता है। परंतु रोओं को गोल-गोल बॉल के रूप में घुमा दिया जाता है।
17. चीज क्लॉथ (Cheese Cloth) :- एक अति कोमल रचना का प्राकृतिक रंग में ब्लीच किया हुआ या रंगा हुआ तथा निम्न गणांक का कपड़ा होता है। इसे टोबेको क्लॉथ भी कहते हैं क्योंकि टोबैको के पौधे को ढूंढने में प्रयोग होता है।
18. कोरट(Covert) :- एक संघन और कसी बुनाई का दो प्लाई yearn से बना कपड़ा जिसमें एक धागा कपास का तथा दूसरा ऊन होता है दोनों अलग-अलग रंग पकड़ते हैं फलस्वरुप बाह्य रूप रंग बिरंगा हो जाता है।
19. फ्लेनेल (Flannel) :- एक हल्का रोएँदार कपड़ा होता है छोटे शिशुओं के लिए प्रयोग करते हैं क्योंकि यह कपड़ा बहुत नरम होता है।
20. गॉज(Gauze) :- सादी बुनाई जो दूर-दूर छितरी हुई होती है। प्रायः बैंडेज में या हलवाइयो के पास दही छानने के लिए प्रयोग होता है।
21. जिघंम( Gingham) :- रंगीन धागों से रिब बुनाई बना विभिन्न वजन का सूती वस्त्र होता है कभी-कभी रेयन आदि के मिश्रण से भी बनाते हैं।
22. लॉन्ग क्लॉथ(Long Cloth) :- इसको लट्ठा भी कहते हैं। सादी बुनाई वाला, संतुलित रचना का श्वेत सूती कपड़ा होता है| पजामा,सलवार,पेटिकोट के काम आता है।
23. नैनसुक (Nainsook):- एक सुकोमल संतुलित रचना का कम पारदर्शी सादी बुनाई का सूती कपड़ा होता है सफेद पेस्टल कलर या छपाई से कई प्रकार का बनाया जाता है।
24. निनॉन (Ninon):- एक शादी बुनाई का संदल चिकना एसीटेट या पॉलिएस्टर फिलामेंट से बना कपड़ा होता है।
25. आर्गन्जा (Organza) :- एक रेयान व सिल्क से बना कोमल कपड़ा होता है साड़ियों को बनाने के लिए प्रयुक्त होता है आजकल सूट भी बन रहे हैं।
26. सेल क्लाथ(Sail cloth) :- एक 2/1 बास्केट वीव से बना वजनी कपड़ा होता है।
27. शार्क स्कीन (Shark skin):- यह वूलन या वर्सिटीड 2/2 की बुनाई में दो रंग के धागों से बना चिकने सपाट बाह्य रूप का कपड़ा होता है और महिलाओं के समर सूट बनाने के काम आता है।
28. टाफ्टा (Taffetta):- कोई भी प्लेन बुनाई में संतुलित या धारीदार रचना का फिलामेंट यार्न से बना कपड़ा होता है।
29. वेलवेट (Velvet) :- यह पाइल फंदों से बना कपड़ा होता है जिसमें उन्हें विभिन्न आकारों या डिजाइनर में काटकर सुंदर रूप प्रदान किया जाता है। पहले यह राज परिवार के लिए ही विशेष होता था किंतु अब सामान्य व्यक्ति भी इसका प्रयोग करते हैं।
30. जैस्पे क्लॉथ (Jaspe Cloth) :- यह बहुरंगी वारप धागे व सादे फीलिंग धागों से शादी बुनाई के द्वारा सूटिंग वेट यानी वजनी कपड़ा होता है।
31. काशा (Kasha) :- एक प्रकार का फ्लैनल (फलालैन) का कपड़ा होता है जिसमें फिलिंग धागे काले या अन्य रंग के दिखाई देते हैं |
32. लिनन (Linen) :- यह सूती तथा वनस्पति रेशों से प्राप्त एक महंगा कपड़ा है | यह अपने फाइबर के नाम से ही संबोधित किया जाता है |
33. क्रेप (Crepe) :- क्रेप यार्न से या क्रेप इफेक्ट के द्वारा बना कपड़ा होता है |
34. डिमिटी (Dimity) :- इसकी लंबाई में कुछ निश्चित मध्यांतर पर कॉर्ड - कॉर्ड डोरियां रहती हैं तथा फिलिंग यार्न एक ही रहता है जिसमें कॉर्ड उभरी दिखाई देती है |
35. सुएड (Suede) :- यह सादी या ट्वील बुनाई का कांटे छांटे रोएं से बनाया जाता है | जिससे चमड़े के सामान लगता है | इससे बर्फ पर फिसलने वाले खेल (स्कीइंग) के कपड़े बनते हैं |
36. गेबरडीन (Gabardine) :- यह वस्त्र तानेदार धारियों की ट्वील का होता है | ढलवां ट्वील से बनी मुंडेरे प्रमुख रूप से ऊपर की सतह पर दृष्टिगोचर होती है |
37. डेनिम (Denim) :- रंगीन धागों से बनें खेल के कपड़े, जींस , कैपरी आदि बनती है | रफ एंड टफ (Ruff and Tuff ) कपड़ा होता है |
38. जीन (Jean) :- बच्चों के खेल के कपड़े ड्रेप्ररी स्लिपकवर फैक्टरी आदि में ट्वील बुनाई के कपड़े होते हैं |
39. ओरगण्डी (Organdy) :- एसिड परिसज्जा द्वारा कड़ा किया हुआ तथा चिकनी रचना का कपड़ा होता है | शिकन जल्दी पड़ जाती है |
40. वायल (Voil) :- एक चिकना कपड़ा है जो खूब बटे धागे से बना रहता है | पहले सूती ही बनता था , अब मिश्रण से भी बनाया जाता है |
41. शिफॉन, जार्जेट (Chiffon, Georgette) :- दोनों ही क्रेप स्पर्न से बनते हैं | शिफॉन अधिक कितनी चमक वाली होती है |ये सब शियर फैब्रिक (Shear Fabric) कहलाते हैं , शिफॉन चिकनी सूक्ष्म धागे से बनी बारिक वस्त्र साड़ी ,सूट तथा नाइटी-गाउन के लिए भी प्रयोग की जाती है |
42. मसलिन (Muslin) :- चिकनी सतह का , सादी बुनाई का , संतुलित रचना का , भिन्न - भिन्न वजन का , महीन फाइन मलमल (Muslin) कहलाता है | ढाका की मलमल तो संसार में प्रसिद्ध है |
43. वाश एंड वियर (Wash and Wear) :- मीडियम वेट का चिकना , हल्का , कलफदार रेसिन की परिसज्जा युक्त सादा या छपा हुआ कपड़ा होता है |
44. लोन (Lawn) :- रेसिन या स्टार्च की परिसज्जा दिया हुआ चिकना हल्का कपड़ा होता है | इसे प्रायः प्रिंटिड बनाया जाता है |
45. कॉर्डरॉय (Corduroi) :- यह धारियों में पाइल कपड़ा है | इसमें लंबबध्द पंक्तियों की वैलवेट की धारियां दिखाई देती हैं |
46.डमास्क (Damask):- इसमें साटन की पृष्ठभूमि पर साटन के फ्लोट से नमूने बनाए जाते हैं पृष्ठभूमि के फ्लोट से बने नमूने इसके विपरीत दिशा में रहते हैं।
47. शानटुगं (Shantung) :- इसमें रिब क्रमहिन ढंग से रहता है, वह मीडिया वेट तथा शूटिंग वेट दोनों में तमाम प्रकार के रेशे से बनता है।
48. ब्रोड क्लाथ (Broad Cloth) :- इसमें सबसे महीन रिब रहती है। यह मीडिया वेट रिब्ड (Ribbed) फैब्रिक के अंतर्गत आता है तथा इसमें ताने-बाने के धागों का व्यास सम्मान रहता है।
49. टेपा क्लॉथ (Tapa Cloth):- बिना बुने हुए हुए पेड़ की तंतुमई छाल से बना वस्त्र होता है यह प्राचीन काल से चला आ रहा है कपड़ा है और कई विशेष स्थानों के मूल निवासियों के द्वारा तैयार किया जाता है यह कपड़े कागज के से लगते हैं। नॉन वूवन कपड़ों को बनाने का प्रयास भी आजकल सफल हो रहा है।
50. सीयर सकर (Seer Sucker):- यह पकरड रेयान (Puckered rayon) कपड़े होते हैं। यह सादी बुनाई में बनते हैं जिसमें फिलिंग धागों में कुछ पंक्तियों में crape yarn रहते हैं तथा उतनी ही अन्य पंक्तियों में नियमित रचना के yarn रहते हैं। यह क्रम बराबर रहता है । ताने के धागे सब नियमित रचना के रहते हैं। इस पर परिसज्जा देने से crape yarn कुछ सिकुड़ जाते हैं जिसमें चौड़ाई में नियमित दूरी पर पकरस अर्थात झुरिया सी बन जाती है। उपलिखित 50 प्रकार के वस्त्रों के विषय में वर्णन किया गया है। अपनी आर्थिक स्थिति व अपनी आवश्यकता समय व स्थान के अनुसार ही वस्त्र बनाने के लिए कपड़े का चुनाव करना सरल होगा।
इस आर्टिकल में हमने कपड़े से संबंधित कुछ शब्दकोश के बारे में जाना अगर आपको हमारी यह आर्टिकल अच्छी लगी हो तो शेयर जरूर करें।
फैशन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें। https://fashiongrandtec.blogspot.com/2021/05/what-is-fashion.html धन्यवाद 🙏
फैशन के क्षेत्र में क्या हो रहा है?What is happening in the field of fashion?
रहन-सहन अनुसार बदलने वाले फैशन :--
मौसम के अनुरूप फैशन:-
अभी के समय चलने वाला फैशन :-
What is an over lock machine? And what are its parts and safe methods that can be taken while running. ओवर लॉक मशीन क्या है । तथा इसके पुर्जे तथा चलाते समय ली जा सकने वाली सुरछित विधियां क्या है।
over lock machine
ओवर लॉक मशीन क्या है ? तथा इसके पुर्जे तथा चलाते समय ली जा सकने वाली सुरछित विधियां क्या है।
ओवरलॉक मशीन :-
ओवरलॉक मशीन पोशाकों के किनारों को अंतिम रूप प्रदान करने के लिए प्रयोग की जाती है इसके अलावा एक से अधिक धागों के समूह के साथ भी कपड़ों की सिलाई करती है। इस मशीन की स्टिच लेंथ 0 से 5 मिली मीटर तक है। इसके द्वारा सिलाई किए गए कपड़े को stitch किया जा सकता है।
आज के फैशन और शुरुआती फैशन के बीच अंतर Difference between today's fashion and earliest fashion
Today's fashion & earliest fashion
आज के फैशन और शुरुआती फैशन के बीच अंतर। Difference between today's fashion and earliest fashion ?
🌽🌽🌽🌽🌽🌽🌽🌽🌽🌽🌽🌽🌽🌽🌽🌽
फैशन ऐसी प्रक्रिया है। जो चक्र के तरह घुमता रहता है । फैशन शुरू से लेकर अब तक जितने भी पहनावे देखने को मिल रहे हैं फैशन चक्र की तरह घूम फिर के बाजार में लोगों के सम्मुख प्रस्तुत करते है नए रूप में। फैशन हर समय बदलता रहता है। बात रहा आज की फैशन व शुरुआती फैशन के बीच अंतर जानना ।
शुरुआती फैशन वह फैशन है। जो सभ्यता व संस्कृति से परिपूर्ण होता है । और आज के फैशन में लज्जा हीन फुहड़ता देखने को मिलता है। आज हम इस आर्टिकल में आज के फैशन शुरुआती फैशन के बारे में जानेंगे।
आज के फैशन व शुरुआती फैशन के बीच बहुत से अंतर देखने को मिलते हैं सभ्यता के विकास के साथ साथ फैशन में भी आश्चर्यजनक परिवर्तन होते हुए। यह परिवर्तन और फैशन 400 B.C (before Christ) से माना जाता है। तथा 12वीं सदी से ही फैशन की अच्छी शुरुआत हुई । उस युग से ही प्राचीनतम वस्त्र विज्ञान की धारा में एक परिवर्तन हुआ जिसे मध्यकालीन युग के फैशन में एक नई शुरुआत मानी जाती है। इससे पहले लोग फैशन कपड़ों से ज्यादा पेड़ पत्तों के पहनावे से दिखाते थे धीरे-धीरे परिवर्तन होता गया और फैशन नए-नए रूप लेते गए। देखा जाए तो मध्यकालीन युग के फैशन में एक नई शुरुआत मानी जाती है उस काल में स्त्री पुरुष ही डबल ट्यूनिक पोशाक समीज जिसकी लंबी बाजू तथा हाई नेक पहना करते थे। साथ ही उन्हें ओवर ट्यूनिक भी होती थी जिसकी बाजूए ढीली होती थी जिसका प्रयोग सर्दी के मौसम में किया जाता था।
उसके बाद फैशन के तौर-तरीके दिन पर दिन बढ़ता गया और पहनावे में परिवर्तन होता गया 12वीं सदी में एक खास तरह से fine fabric पूर्वी देशों से आई थी, उसी से यूरोप में बहुत ऊंचे स्तर elegant पोशाके बनाई जाने लगी । फैशन की शुरुआत मध्यकाल से हुई इससे पहले कि सदी में लोग पत्ते व कपड़े का उपयोग बस शरीर पर लपेटने के लिए करते थे आज हम फैशन और कपड़े की इतिहास पर रोशनी डालते हैं कि किस काल में किसने कौन सी चीज को चालू किया और किस काम में तरक्की की जो इस प्रकार है।
1. आर्य काल
2. मध्यकाल
3. मुगल काल
4. ब्रिटिश काल
5. आधुनिक काल
अब हम जानेंगे शुरू से लेकर अब तक के फैशन में परिवर्तन और अंतर के बारे में कि किस तरह से शुरुआती फैशन और आज के फैशन में अंतर देखने को मिले।
1. आर्यकाल :- संसार के बनने से पहले यह धरती एक आग का गोला था दूसरी जो चीज दिखाई देती थी वह सिर्फ पानी था। जब आदमी जाति की शुरुआत हुई तो लोग नंगे ही फिरते थे। यही नहीं फिर धीरे-धीरे वही आदमी दिमाग का इस्तेमाल करने लगा बीज का पता लगाने, जिसको बीज कर समय अनुसार उसमें से एक मोटी तार निकाली जा सके जिससे कपड़ा तैयार होने लगा। इसी प्रकार और प्रगति हुई जिससे इंसान ने रेशम के कीड़े पालकर रेशम तैयार किया। इस युग में बहुत उन्नति हुई इस युग में धोती पहनने का रिवाज था, अंगिया भी डाली जाती थीं। इस युग में कपड़े सिलाई होने शुरू हुए इस काल को राम और कृष्ण का युग भी कहा जाता है। उनकी मूर्तियां अथवा पुरानी शिलाओ से पता लगता है कि आदमी सिर्फ धोती पहनकर अपने शरीर को ढक लेते थे और स्त्रियां धोती के साथ अंगिया पहनती थी। इसलिए इस काल में फैशन का कोई खास प्रचार नहीं हुआ। धोती और अंगिया ही डाली जाती थी जो बिना सिलाई के पहनी जाती थी अंगिया भी एक छोटी सी पट्टी लेकर छाती के अगले हिस्से खोलकर और पिछली तरफ उसी कपड़े को गांठ लगा दी जाती थी।
2. मध्यकाल (Medieval period) :--
इस काल को स्वर्ण युग या सोने का युग कहा जाता है इस युग को उन्नति का युग कहा जाता है इसमें पूरातनता को सामने रखते हुए नयापन पैदा किया गया । यही युग है जिसमें मनुष्य ने जीना सिखा सभ्यता की ओर कदम बढ़ाएं और बनाने के लिए भी कपड़ा अच्छा डालने लगा अधिकतर लोग चोला ही पहनते थे या लंबे-लंबे चोगा । अंगरक्खा पट्टीयों का बना होता था। यह वह ड्रेस है जो आज तक लोग राजस्थान में डालते हैं। नेपाली लोग तो बहुत ही इस प्रकार की ड्रेस पहनते हैं इस ड्रेस की अंदाजे से ही सिलाई की जाती थी। आर्य लोग बिना सिलाई के कपड़े डालते थे परंतु यह पट्टीयों को हाथ से ही जोड़कर और चोला भी सीधे डालकर बनाया जाता था। कपड़े अंदाजे से ही काट लिए जाते थे और सिर्फ शरीर ढकने लग पड़े थे। फिटिंग का सवाल ही पैदा नहीं होता था। जिस प्रकार का कपड़ा तैयार हुआ उसी तरह का ही अच्छा लगने लग जाता था। परंतु इस युग में उन्नति बहुत हुई। कढ़ाई भी थोड़ी बहुत इसी युग में चली इस प्रकार इस युग को स्वर्ण युग कहा जाता है इससे आगे चलकर भी इस काल में बहुत उन्नति हुई।
3. मुगल काल ( Mughal period) :- -
1627 ई. मैं मुगलों का आगमन हुआ यह लोग ईरान और अफगानिस्तान से होते हुए पंजाब आए ठंडे देश के रहने वाले थे इसलिए यह लोग चूड़ीदार पजामा से ढींगरी कट पजामा, बंद गले का कुर्ता प्रयोग करते थें। महिलाएं भी बुर्का पहनती थीं। इसका पंजाब के लोगों पर भी असर पड़ा ऊपर का बुर्का नहीं लिया परंतु बाकी कमीज सलवार की ड्रेस जरूर ले ली। ऊपर दुपट्टा लेने लगे। मुसलमान तो चाहे बुर्के में से निकलकर बेल बाटम और शर्ट पर आ गए, परंतु पंजाब में तो अभी भी लड़कियों को विशेषकर गांव के लोग सिर के ऊपर अच्छी तरह चुन्नी ओढ़नी लेने को कहते हैं। इनके आने से ही परदे की रस्मे शुरू हुई। मुगलों कपड़ा पहनना अच्छी तरह जानते थे वह तंग पजामी और खुला कुर्ता शौक से पहनते थे। इस युग में भी इन पर गिरह का पता नहीं था फिर भी अंदाजे से फिटिंग रखी जाती थी। मुगल काल में बहुत उन्नति हुई। मुगल काल में सोने का प्रचार पहले से ही शुरु था और इन लोगों के कपड़ों पर सोने का बटन लगाए जाने लगे। वैसे तो यह सब कुछ स्वर्ण युग में हुआ। पर इस युग में सोने चांदी के तारों से कढ़ाई होने लगी सलमा तिल्ले का इस्तेमाल होने लगा। उनकी पोशाक के ऊपर सलमे और तिल्ले का प्रयोग किया जाने लगा। लोग कुर्ते कढ़ाई किए हुए या बंद गले की शेरवानी पहन कर और मुंह में पान रखना ही शान समझते थे। उस समय से ही यह मलमल चली थी जिसको कहा जाता है कि एक अंगूठी में से पूरा पूरा थान निकल जाता था। इससे यह तात्पर्य यह है कि बहुत बारीक कपड़ा बना। इसको ढाके की मलमल भी कहा जाता है इस काल में लोग कपड़ा बनाना सीख गए थे और सिलाई किया हुआ और कढ़ाई किया हुआ कपड़ा पहनते थे। इस साल से लोगों ने कढ़ाई सिलाई सीखी ।
4. अंग्रेजों का काल (British period) :--
अंग्रेज लोग सबसे पहले भारत में व्यापार करने आए थे उस समय मुगलों का पूरा बोलबाला था उस समय अंग्रेजों ने 1600 ई. में East India Company की स्थापना की। उस समय अंग्रेजों ने कारखानों में अपने मजदूर रखे जो पराया भारतवासी ही थे । इन वर्दीयो को इंग्लैंड से बनाकर लाया करते थे। ड्रेस डालकर भी बहुत चुस्त दिखाई देते थे प्रत्येक भारतीय जो उनका नौकर था वर्दी डालने पर मजबूर था। परंतु बाद में यह उनका शौक बन गया। वर्दियां डालकर कहीं आना जाना अपनी शान समझने लगे और यही शान उनका फैशन बन गया तथा प्रत्येक हिंदुस्तानी अंग्रेज बनने की कोशिश करने लगा। यदि देखा जाए तो फैशन की अच्छी प्रकार से शुरुआत अंग्रेज के जमाने में हुई। यह वह युग आ गया था जो हाथ से सिलाई ना कर के मशीन से काम शुरू हो गया था तब सिलाई होने लगी जब अंग्रेजों द्वारा सिलाई की मशीन भारत में लाई गई। इन मशीनों को लेकर आने से अंग्रेजों को दो लाभ हुए एक तो यह मशीनों की बिक्री बहुत हुई दूसरा उनका समय बहुत बच गया क्योंकि पहले उनको इंग्लैंड जाकर कपड़े लाने पड़ते थे और अब भारत में ही रेडीमेड कपड़े लेने लगे। वह जमाना आ गया था कि दिनों का काम एक दिन में होने लगा और दिन का काम घंटों में होने लगा हाथ से वह सफाई नहीं आ सकती जो मशीन से आती है। अंग्रेजों की ड्रेस में बहुत फर्क था जबकि पहले कोई भी पैंट शर्ट नहीं पहनता था। अंग्रेजों ने ही हर एक को पैंट डालना सिखा दिया। अंग्रेजों की पोशाक कोट, पेंट, कमीजे, हाफ कोट, हाफ पेंट आदि थी और औरतों की ड्रेस भी वही थी। परंतु भारत में औरतों ने एक ड्रेस पहले परदे की ले ली थी और अंग्रेजों की ड्रेस का औरतों पर कोई असर नहीं पड़ा। आदमी भी अंग्रेजों के दफ्तरों में काम करते थे , इस तरह करके उन पर ड्रेस का असर बहुत बढ़ गया और आज तक अंग्रेजों की देन प्रत्येक भारतीय पाकर खुश होता है। सिर्फ कपड़े का ही असर नहीं हुआ बल्कि कपड़े को एक नया रूप दिया जाने लगा। हर कोई कपड़े की फिटिंग करके डालने लगा। कई बड़े घरों की लड़कियां भी स्कर्ट और पेंट डालती थीं इस युग में अनुमान से काम नहीं लिया जाता था इंची टेप चल पड़ा था और गिरह का रिवाज कम हो गया था। इसलिए अब हम यह कह सकते हैं कि साइंस की उन्नति के साथ-साथ उद्योग में भी बहुत उन्नति हुई और सिलाई में बहुत उन्नति हुई । अब हम कह सकते हैं कि कटाई सिलाई फिटिंग और फैशन की जो तरक्की अंग्रेजों के काल में हुई वह किसी काल में भी नहीं हुई। आज भी कपड़े के डिजाइन और कटिंग के वास्तविक फार्मूले दिखने के लिए इंग्लैंड से किताबें मंगवाते हैं और उन पर ही अमल करके अंग्रेज कल आने की पूरी पूरी उम्मीद रखते हैं।
5. आधुनिक काल (Modern period) :-
आधुनिक काल वह काल है जो अब के समय में लोग फैशन को अपनाते हैं। देश को पूर्ण आजादी 15 अगस्त 1947 को मिली। आजादी के साथ-साथ प्रत्येक समुदाय को अपने dress डालने की आजादी मिली है। ये Fundamental rights है कि कोई भी कपड़ा डाली जाए किसी प्रकार की भी जिंदगी जिए, परंतु आजादी के साथ साथ अंग्रेजों की ड्रेस में भारत के dress का भी हिस्सा पाया गया अर्थात शुद्ध अंग्रेजी ड्रेस नहीं डालते। यह देखने में आया है कि आजादी के बाद प्रत्येक को आजादी मिली तो नयेपन की जगह पुरानेपन ने ज्यादा पैर रखा। प्रत्येक ने अपने पूर्वजों के पद चिन्हों पर ध्यान दिया औरतें साड़ी ब्लाउज और मर्द धोती कुर्ता पहनते थे। ऐसे ही करके यह ड्रेस हिंदुस्तानी ड्रेस बन गई। परंतु हमारे नेशनल ड्रेस खादी की है, जो हमारे देश में हाथ की खड्डी से बनाई जाती है। विशेषकर नेताओं की ड्रेस खद्दर अथवा खादी की है, चाहे खद्दर डिपो का खद्दर नहीं होता और कम से कम ₹200 मीटर का खद्दर है। फिर भी वे सादगी नजर आते हैं। देश आजाद होने के बाद खद्दर गांधीजी ने चलाया था, वह हाथ का बना खद्दर होता था और उन्होंने आम जनता जैसा ही खद्दर डाला। परंतु आज खद्दर बहुत superior quality का बनने लग पड़ा है और वह खद्दर तो नाम का खद्दर ही है। इस खद्दर की गांधी टोपी, जवाहर जैकेट यह सभी नेशनल ड्रेस में आते हैं। खद्दर वास्तव में ही एक ऐसी ड्रेस है जिससे प्रत्येक इंसान अच्छा लगता है। आज हर प्रकार की शीघ्र से शीघ्र बनने वाले ड्रेस की प्रबंध हो चुके हैं। परंतु यह ध्यान देने योग्य बातें हैं कि Golden period मैं ड्रेस असली बनने लगी और वह असली ही आज नकली रूप लेकर सुंदरता का उभार बन चुकी है। आज चाहे देश प्रगति पर है परंतु कोई भी असली चीज नहीं है। बाल की खाल उतारी जाती है और नई से नई नकली चीज बनाई जाती है। देखा जाए तो प्रत्येक मनुष्य के कपड़ों को देखकर ही अंदाजा लगा लिया जाता है कि यह कितने पानी में है। ड्रेस से ही इंसान की स्मार्टनेस का पता चलता है। आज वही भारत है जिसकी चप्पे-चप्पे पर ऑटोमेटिक मशीन का प्रयोग किया जाता है परंतु आज प्रत्येक मनुष्य पुराने ख्यालों को छोड़कर नवीनता प्राप्त करने की कोशिश करता है। यह सब जो नया निकाला जाता है किसी न किसी जमाने की देन होती है। वर्तमान युग में यदि छोटे बच्चे के कपड़ों की ओर ध्यान दें तो यह विभिन्न प्रकार के तैयार रेडीमेड ऋतु के अनुसार मिलते हैं सर्दियों के गर्म सूट, जीन सूट, सफारी सूट, खिलाड़ी सूट और ऊनी कई प्रकार के सूट। जो लड़कियां अथवा बच्चियां है उनके लिए कई प्रकार की स्कर्ट , मैक्सी और फ्रॉके आदि । स्त्रियों और नौजवान लड़कियों में जहां फैशन की दौड़ है , वहां हमारे नौजवान लड़के और आदमी भी इस दौड़ में पीछे नहीं है। वह भी नए डिजाइन के extraordinary कपड़े डालने में अपनी शान समझते हैं। नई डिजाइन की कपड़ों में फैंसी मैचिंग कपड़े फूल एवं बेल बूटे, वाले कपड़े और अन्य 'A' cut फैंसी कपड़े, हैं। इन पर कई प्रकार के बेल बूटे कढ़ाईया अलग-अलग प्रकार के डिजाइन बनाए जाते हैं ताकि इनको डालकर वे अपनी बनावट को और आकर्षक बना सके। इस समय भारतीय कपड़े और डिजाइन इतनी तरक्की कर चुकी है कि उनकी मांग इंटरनेशनल स्तर तक पहुंच चुकी है भारतीय ड्रेस और सिलाई की हर एक स्तर पर शान और कीमत है।
देखा जाए तो आज के फैशन में औरतों की टांगों का खुला प्रदर्शन फैशन में आ गया है इस समय मैचिंग का बहुत प्रचलन हो गया है। जूते व कपड़ों के रंग एक जैसे लिए जाने लगे है। 21वीं सदी जो कि आज चल रही है इस समय मिनी स्कर्ट घुटने तक की स्कर्ट के साथ स्टॉकिंग का रिवाज है। आप भी फ्रिली बनने लगी। उन पर लैस का भी प्रयोग किया जाता है। पुरुषों में पैंटस, जींस, हाफ पैंट का चलन है साथ में टीशर्ट या स्लीवलेस टी-शर्ट का फैशन है। ट्राउजर के साथ कलर वाले शर्ट ऑफिसों में पुरुषों में खास पहनावा है। सर्दियों में सूट का भी फैशन हैं। इस प्रकार सदियों पर सदीयां बीतती रही हैं । समय तथा युग की मांग तथा अपनी सहूलियत के अनुसार व्यक्ति वस्तु का चलन बदलता है यह सदियों से ऐसे ही चली आ रही परंपरा है। आज के फैशन में हमें देखने को मिलता है पुराने पहनावे को नए रूप में प्रस्तुत करते हैं लोगों के सम्मुख।
दोस्तों आज हमने जाना शुरू से लेकर आज तक के फैशन के बीच अंतर अगर आपको हमारी यह आर्टिकल अच्छी लगी हो तो पोस्ट को शेयर जरूर करें।
टेक्सटाइल के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें|👇
https://fashiongrandtec.blogspot.com/2021/06/what-is-textile.html
धन्यवाद🙏
आधुनिक फैशन दृष्टिकोण क्या है?What is the modern fashion approaches?
होने देना चाहिए। तथा कई लोग ऐसे भी होते हैं जो फैशन में इतने अंधे हो जाते है । फैशन अपनाते अपनाते वह ऐसा फैशनेबल रूप धारण कर लेते हैं जिससे वह पहचाने भी नहीं जाते कि वह वास्तविक देखने में लड़का है या लड़की खुद को पूरी तरह से बदल लेते हैं। फैशन आधार पर हम सभी जानते हैं कि बहुत सी लड़कियां ऐसी होती हैं जिन्हें लंबे बाल रखना बेहद पसंद होता हैं पर आजकल आधुनिक फैशन के क्षेत्र में हम देख पाते हैं कि लड़के भी लंबे बाल रखने लगे हैं हमें यह मानना चाहिए इस तरह के फैशन कहां तक सही माने जाते हैं।
गर्मी के मौसम में कपड़े के रूप में पहनने के लिए हम किस प्रकार के फाइबर का उपयोग करते हैं? What type of FIBRE do we use to wear in summer season as clothes?
कपड़ा डिजाइनिंग में उपयोग किए जाने वाले सामान्य उपकरण कौन से हैं? What are the common tools used in textile designing?
Fashion
"फैशन डिजाइनिंग में ड्राइंग और स्केचिंग: एक पूरी गाइड"
"फैशन डिजाइनिंग में ड्राइंग और स्केचिंग: एक पूरी गाइड" "फैशन डिजाइनिंग में ड्राइंग और स्केचिंग: एक पूरी गाइड" फैशन डिजाइ...
-
"फैशन डिजाइनिंग में ड्राइंग और स्केचिंग: एक पूरी गाइड" "फैशन डिजाइनिंग में ड्राइंग और स्केचिंग: एक पूरी गाइड" फैशन डिजाइ...
-
फैशन डिजाइनिंग का परिचय एक फैशन डिजाइनर का रचनात्मक स्टूडियो, जहां स्केच, रंगीन कपड़े, सिलाई उपकरण और ट्रेंडी परिधान पहने हुए मैनेकिन्स हैं।...
-
फैशन डिजाइनिंग का पूरा सिलेबस: करियर, स्किल्स और अवसर फैशन डिजाइनिंग में टेक्सटाइल और फैब्रिक स्टडी फैशन डिजाइनिंग एक रचनात्मक क्षेत्र है जि...
